कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) क्या है?
EPF (Employees' Provident Fund) वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए एक अनिवार्य रिटायरमेंट बचत योजना है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों हर महीने योगदान करते हैं।
यह भारत सरकार द्वारा समर्थित है और EEE (Exempt-Exempt-Exempt) श्रेणी में आता है, यानी निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों टैक्स-फ्री हैं (कुछ शर्तों के साथ)।
योगदान का बंटवारा (Contribution Split)
आप और आपकी कंपनी दोनों (Basic Salary + DA) का 12% योगदान करते हैं। लेकिन इसका बंटवारा इस प्रकार होता है:
- कर्मचारी का हिस्सा: पूरा 12% आपके EPF खाते में जाता है।
- नियोक्ता का हिस्सा: 3.67% EPF में और 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है।
EPF बनाम PPF: कौन बेहतर है?
| विशेषता | EPF (कर्मचारी) | PPF (पब्लिक) |
|---|---|---|
| ब्याज दर | 8.25% (अधिक) | 7.1% |
| पात्रता | केवल वेतनभोगी | कोई भी नागरिक |
| लॉक-इन | रिटायरमेंट तक (58) | 15 वर्ष |
| नियोक्ता मैच | हाँ (12%) | नहीं |
EPF पर टैक्स नियम (₹2.5 लाख की सीमा)
बजट 2021 के नए नियम के अनुसार, यदि एक वित्तीय वर्ष में आपका कुल योगदान (Employee Share + VPF) ₹2.5 लाख से अधिक है, तो अतिरिक्त राशि पर मिलने वाला ब्याज कर योग्य (Taxable) होगा।
EPF ब्याज गणना का फॉर्मूला
ब्याज की गणना मासिक शेष राशि (Opening Balance + Monthly Contribution) पर की जाती है:
*ब्याज की गणना हर महीने होती है लेकिन खाते में जमा (Credit) 31 मार्च को होता है।