Sovereign Gold Bonds (SGB) Guide: ब्याज, टैक्स और रिडेम्पशन
Sovereign Gold Bonds (SGB) भारत सरकार और RBI द्वारा जारी किया गया एक अनोखा डिजिटल गोल्ड निवेश विकल्प है। यह आपको सोने की कीमतों का फायदा तो देता ही है, साथ ही 2.5% तक अतिरिक्त ब्याज, टैक्स बेनिफिट और पूरी तरह सरकारी सुरक्षा भी प्रदान करता है।

SGB = सोने का भाव + 2.5% सालाना ब्याज (Dual Benefit)
1. Sovereign Gold Bonds क्या हैं?
SGB एक सरकारी सिक्योरिटी (Government Security) है जिसकी वैल्यू सोने (Gold) के भाव से जुड़ी होती है। इसे RBI भारत सरकार की ओर से जारी करता है।
- 1 यूनिट SGB = 1 ग्राम (999 शुद्धता वाला) सोना।
- आप इसमें डीमैट फॉर्म या फिजिकल सर्टिफिकेट के रूप में निवेश कर सकते हैं।
2. SGB क्यों बेहतर है Physical Gold से?
फिजिकल गोल्ड (जेवर, सिक्के) खरीदने में मेकिंग चार्ज और सुरक्षा की चिंता होती है। SGB इन सभी समस्याओं का समाधान है।
फिजिकल गोल्ड सिर्फ भाव बढ़ने पर फायदा देता है। लेकिन SGB में आपको सोने के भाव के अलावा हर साल 2.5% ब्याज भी मिलता है।
निवेश: ₹1,00,000 (SGB में)
ब्याज: ₹2,500 हर साल (सीधे बैंक खाते में)
8 साल में कुल ब्याज: ₹20,000 (सोने के भाव से अलग एक्स्ट्रा कमाई)
- जेवर खरीदने पर 10-20% मेकिंग चार्ज लगता है, जो निवेश के लिहाज से घाटा है। SGB में 0% मेकिंग चार्ज है。
- SGB डिजिटल फॉर्मेट में होता है (RBI की किताबों में या डीमैट में), इसलिए चोरी या शुद्धता की कोई चिंता नहीं。
3. टैक्स बेनिफिट्स (Tax on SGB)
SGB का सबसे बड़ा फायदा इसका टैक्स स्ट्रक्चर है, खासकर मैच्योरिटी पर。
अगर आप SGB को पूरे 8 साल (मैच्योरिटी) तक होल्ड करते हैं, तो सोने का भाव बढ़ने से हुआ पूरा मुनाफा (Capital Gain) 100% टैक्स फ्री होता है।
जो 2.5% सालाना ब्याज मिलता है, वह आपकी इनकम में जुड़ता है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता है。

चार्ट: SGB पर टैक्स के नियम (ब्याज vs मैच्योरिटी)
4. SGB कैसे खरीदें? (Online & Offline)
SGB की नई सीरीज़ RBI द्वारा समय-समय पर (Tranches में) जारी की जाती है。
Bank (Net Banking)
SBI, HDFC, ICICI, Axis आदि की वेबसाइट से।
Stock Broker (Demat)
Zerodha, Upstox, Groww आदि के गोल्ड बॉन्ड सेक्शन से।
Post Office
फॉर्म भरकर ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।
ऑनलाइन खरीदने पर डिस्काउंट
आमतौर पर, अगर आप ऑनलाइन अप्लाई करते हैं और डिजिटल पेमेंट करते हैं, तो सरकार प्रति ग्राम ₹50 की छूट देती है।
सेकेंडरी मार्केट (Stock Exchange)
अगर कोई नई सीरीज़ नहीं खुली है, तो आप शेयर बाजार (NSE/BSE) से पुराने लिस्टेड SGB यूनिट्स भी खरीद सकते हैं। इसके लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है।
5. पैसे कब निकाल सकते हैं? (Premature Exit)
SGB का कार्यकाल 8 साल का है, लेकिन निकलने के विकल्प मौजूद हैं:
| विकल्प | कब संभव है? | शर्तें |
|---|---|---|
| मैच्योरिटी (Maturity) | 8 साल बाद | ऑटोमैटिक रिडेम्पशन, टैक्स फ्री। |
| RBI विंडो (Early Exit) | 5 साल बाद | ब्याज भुगतान की तारीखों पर रिडीम कर सकते हैं。 |
| स्टॉक एक्सचेंज (Sell) | कभी भी | डीमैट खाता जरूरी, लिक्विडिटी कम हो सकती है。 |
6. SGB vs Physical Gold vs ETF – किसे चुनें?
| फीचर | Sovereign Gold Bond | Physical Gold | Gold ETF |
|---|---|---|---|
| ब्याज | 2.5% सालाना | कुछ नहीं | कुछ नहीं |
| सुरक्षा | सरकारी गारंटी | खुद रखनी पड़ती है | डिजिटल (डीमैट) |
| मेकिंग चार्ज | 0% | 8–25% | 0% (ब्रोकरेज) |
| टैक्स (मैच्योरिटी) | Tax Free | Taxable | Taxable |
7. सामान्य प्रश्न (FAQs)
निष्कर्ष: SGB – गोल्ड + ब्याज का स्मार्ट कॉम्बो
अगर आप सोने को सिर्फ पहनने के लिए नहीं, बल्कि निवेश के लिए खरीद रहे हैं, तो Sovereign Gold Bond सबसे बेहतरीन विकल्प है।
- फिजिकल गोल्ड की तरह भाव बढ़ने का फायदा।
- ऊपर से 2.5% का फिक्स्ड ब्याज।
- 8 साल बाद टैक्स फ्री रिटर्न।
- चोरी या मेकिंग चार्ज की कोई चिंता नहीं।
स्मार्ट निवेशक अपने पोर्टफोलियो का 5-10% हिस्सा गोल्ड में रखते हैं, और उसके लिए SGB पहली पसंद होनी चाहिए।
Fincado Research Team
Fact CheckedOur analysis is built on deep-dive research into RBI Benchmarks and lender-specific disclosures. We verify every interest rate and fee structure against real-world borrower approvals to ensure the highest level of accuracy for Indian home buyers.
अस्वीकरण: Sovereign Gold Bond भारत सरकार की योजना है और इसके नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। निवेश करने से पहले कृपया RBI की आधिकारिक अधिसूचना या अपने बैंक से नवीनतम जानकारी की पुष्टि करें। यह लेख केवल जानकारी के लिए है, वित्तीय सलाह नहीं।