एसेट एलोकेशन क्यों जरूरी है?
निवेश का मतलब सिर्फ "सबसे अच्छा" शेयर चुनना नहीं है। इसका मतलब है एक संतुलित पोर्टफोलियो बनाना। एसेट एलोकेशन वह तरीका है जिससे आप अपने पैसे को अलग-अलग जगहों पर लगाते हैं:
इक्विटी (Equity)
पैसे बढ़ाने के लिए (Growth)। लंबी अवधि में सबसे ज्यादा रिटर्न।
डेट (Debt)
सुरक्षा और स्थिरता के लिए। बाजार की गिरावट में पोर्टफोलियो को बचाता है।
सोना (Gold)
बुरे वक्त और महंगाई से बचने के लिए (Hedge against inflation)।
निवेश की रणनीतियाँ (Strategies)
| रणनीति | एलोकेशन | किसके लिए सही? |
|---|---|---|
| एग्रेसिव (Growth) | >70% इक्विटी | युवा निवेशक (10+ साल) |
| संतुलित (Balanced) | 50% इक्विटी / 50% डेट | मध्यम जोखिम लेने वाले |
| सुरक्षित (Conservative) | >70% डेट | रिटायर हो चुके लोग |
म्यूचुअल फंड पर टैक्स (Tax Rules 2026)
इक्विटी फंड्स: 1 साल से ज्यादा रखने पर ₹1.25 लाख से ऊपर के लाभ पर 12.5% टैक्स लगता है (LTCG)।
डेट फंड्स: इसमें होने वाला मुनाफा आपकी आय में जुड़ता है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है (1 अप्रैल 2023 के बाद के निवेश पर)।