RD (रिकरिंग डिपॉजिट) क्या है?
RD एक प्रकार का टर्म डिपॉजिट है जिसमें आप एकमुश्त राशि जमा करने के बजाय, हर महीने एक निश्चित राशि जमा करते हैं। यह वेतनभोगी (Salaried) लोगों के लिए बचत का सबसे अच्छा तरीका है।
RD ब्याज पर टैक्स (Taxation Rules)
RD से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है। यह आपकी कुल आय में जुड़ता है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है।
- TDS: अगर ब्याज ₹40,000 (सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000) से ज्यादा है, तो बैंक 10% TDS काटता है।
- Form 15G/15H: अगर आपकी आय टैक्सेबल सीमा से कम है, तो आप यह फॉर्म जमा करके TDS कटने से रोक सकते हैं।
RD बनाम SIP: कौन बेहतर है?
लोग अक्सर RD और SIP में कंफ्यूज रहते हैं। RD आपको सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न (6.5% - 7.5%) देता है, जबकि SIP (म्यूचुअल फंड) में आपको ज्यादा रिटर्न (12% - 15%) मिल सकता है लेकिन इसमें बाजार का जोखिम होता है।
RD के फायदे (Benefits)
- छोटी बचत: आप मात्र ₹500 प्रति माह से शुरुआत कर सकते हैं।
- निश्चित ब्याज: खाता खोलते समय ब्याज दर लॉक हो जाती है।
- अनुशासन: हर महीने निवेश करने की आदत बनती है।
- लोन सुविधा: आप अपनी RD राशि पर 90% तक का लोन ले सकते हैं।
RD ब्याज गणना का फॉर्मूला
बैंक RD ब्याज की गणना तिमाही चक्रवृद्धि (Quarterly Compounding) के आधार पर करते हैं:
- M = परिपक्वता राशि (Maturity Value)
- P = मासिक किस्त
- r = ब्याज दर (%)
- t = समय (महीनों में)