500200,000
215
030
011
टैक्स विकल्प (Advanced)
030
91% / 9%
Principal / Interest
परिपक्वता राशि (Maturity Amount)
₹1,98,618
कुल जमा (Total Investment)
₹1,80,000
नेट ब्याज (Net Interest)
+₹18,618
TDS (Tax): -₹2,069
क्या आप ज्यादा रिटर्न चाहते हैं?गाइड पढ़ें: FD लैडरिंग से ब्याज कैसे बढ़ाएं

RD (रिकरिंग डिपॉजिट) क्या है?

RD एक प्रकार का टर्म डिपॉजिट है जिसमें आप एकमुश्त राशि जमा करने के बजाय, हर महीने एक निश्चित राशि जमा करते हैं। यह वेतनभोगी (Salaried) लोगों के लिए बचत का सबसे अच्छा तरीका है।

RD ब्याज पर टैक्स (Taxation Rules)

RD से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है। यह आपकी कुल आय में जुड़ता है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है।

  • TDS: अगर ब्याज ₹40,000 (सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000) से ज्यादा है, तो बैंक 10% TDS काटता है।
  • Form 15G/15H: अगर आपकी आय टैक्सेबल सीमा से कम है, तो आप यह फॉर्म जमा करके TDS कटने से रोक सकते हैं।
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RD बनाम SIP: कौन बेहतर है?

लोग अक्सर RD और SIP में कंफ्यूज रहते हैं। RD आपको सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न (6.5% - 7.5%) देता है, जबकि SIP (म्यूचुअल फंड) में आपको ज्यादा रिटर्न (12% - 15%) मिल सकता है लेकिन इसमें बाजार का जोखिम होता है।

RD के फायदे (Benefits)

  • छोटी बचत: आप मात्र ₹500 प्रति माह से शुरुआत कर सकते हैं।
  • निश्चित ब्याज: खाता खोलते समय ब्याज दर लॉक हो जाती है।
  • अनुशासन: हर महीने निवेश करने की आदत बनती है।
  • लोन सुविधा: आप अपनी RD राशि पर 90% तक का लोन ले सकते हैं।

RD ब्याज गणना का फॉर्मूला

बैंक RD ब्याज की गणना तिमाही चक्रवृद्धि (Quarterly Compounding) के आधार पर करते हैं:

M=i=1nP(1+r400)4×ti12M = \sum_{i=1}^{n} P \left(1 + \frac{r}{400}\right)^{4 \times \frac{t_i}{12}}
  • M = परिपक्वता राशि (Maturity Value)
  • P = मासिक किस्त
  • r = ब्याज दर (%)
  • t = समय (महीनों में)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

हाँ। रिकरिंग डिपॉजिट (RD) से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से टैक्सेबल होता है। अगर आपका ब्याज एक साल में ₹40,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) से ज्यादा है, तो बैंक 10% TDS काटता है।