100,00020,000,000
120
130
48% / 52%
Principal / Interest
मासिक किस्त (EMI)
₹43,391
मूल राशि (Principal)
₹50,00,000
कुल ब्याज (Total Interest)
+₹54,13,879
महत्वपूर्ण जानकारी (Key Insights)
  • कम EMI का मतलब अक्सर लंबी अवधि और अधिक कुल ब्याज होता है।
  • छोटा सा प्रीपेमेंट (Prepayment) भी आपके ब्याज में लाखों की बचत कर सकता है।
  • ब्याज दर की तुलना में 'लोन अवधि' (Tenure) कुल भुगतान पर ज्यादा असर डालती है।
  • लोन अप्लाई करने से पहले अलग-अलग बैंकों की EMI चेक करना समझदारी है।
Personal Loan Interest Rates 2025
Lender CategoryInterest Rate (p.a.)Processing Fee
PSU Banks (Salary Account)10.50% — 13.00%1% - 2%
Private Banks10.99% — 16.00%1.5% - 3%
NBFCs & Fintech Apps14.00% — 24.00%2% - 4%
Note: Rates mentioned above are indicative market ranges for borrowers with a Credit Score > 750. Actual rates may vary based on your profile.
क्या आप लोन प्लानिंग में मदद चाहते हैं?हमारी गाइड पढ़ें: EMI कम करने के तरीके

EMI क्या है? (What is EMI?)

EMI (Equated Monthly Installment) वह निश्चित राशि है जो आप हर महीने बैंक को अपने लोन को चुकाने के लिए देते हैं। इसमें मूल राशि (Principal) और ब्याज (Interest) दोनों शामिल होते हैं।

भारतीय बैंक Reducing Balance Method का उपयोग करते हैं, जिसका अर्थ है कि ब्याज केवल बकाया राशि पर ही लगाया जाता है, पूरी राशि पर नहीं।

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EMI को प्रभावित करने वाले कारक

  • लोन राशि (Principal): जितनी बड़ी राशि, उतनी बड़ी EMI।
  • ब्याज दर (Interest Rate): कम ब्याज दर का मतलब है कम मासिक बोझ। इसलिए हमेशा बैंकों की तुलना करें।
  • अवधि (Tenure): लंबी अवधि चुनने से मासिक EMI कम हो जाती है, लेकिन बैंक को दिया जाने वाला कुल ब्याज काफी बढ़ जाता है।

EMI गणना का फॉर्मूला

बैंक निम्नलिखित गणितीय सूत्र का उपयोग करके आपकी किस्त तय करते हैं:

E=P×r×(1+r)n(1+r)n1E = P \times r \times \frac{(1 + r)^n}{(1 + r)^n - 1}
  • E = EMI राशि
  • P = मूल लोन राशि (Principal)
  • r = मासिक ब्याज दर (वार्षिक दर ÷ 12 ÷ 100)
  • n = महीनों की संख्या (Tenure in months)

अन्य लोन कैलकुलेटर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

कैलकुलेटर पर EMI चेक करने से क्रेडिट स्कोर पर कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि, अगर आप लोन लेने के बाद समय पर EMI नहीं चुकाते हैं, तो आपका सिबिल (CIBIL) स्कोर कम हो सकता है।

Fincado Research Team

Fact Checked

Our analysis is built on deep-dive research into RBI Benchmarks and lender-specific disclosures. We verify every interest rate and fee structure against real-world borrower approvals to ensure the highest level of accuracy for Indian home buyers.

Verified: Jan 2026
Methodology: Data-Driven
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